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अतिक्रमण हटाने गई टीम से भिड़े भाजपा कार्यकर्ता : पुलिस ने पकड़ा, मंत्री ने छुड़ाया

सीतापुर: प्रदेश के सीतापुर जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक मंदिर के चबूतरे को तोड़े जाने पर भारी बवाल खड़ा हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि राज्य के नगर विकास राज्य मंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’ अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ देर रात कोतवाली थाने पहुंच गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया।

यह पूरा मामला सीतापुर शहर कोतवाली क्षेत्र के राम्पा रोड का है। यहाँ नगर पालिका और प्रशासनिक टीम सड़क चौड़ीकरण के उद्देश्य से अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इसी कार्रवाई के दौरान सड़क किनारे बने एक मंदिर के सामने का चबूतरा ढहा दिया गया। चबूतरा तोड़े जाने का स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता जितेंद्र मिश्रा और उनके बेटे शुभम मिश्रा ने कड़ा विरोध किया।

आरोप है कि इस दौरान उनकी प्रशासनिक अधिकारियों और मौके पर तैनात पुलिस बल के साथ तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने पिता-पुत्र दोनों को हिरासत में ले लिया और उन्हें गाड़ी में बैठाकर सीधे शहर कोतवाली ले आई।जैसे ही अपने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर नगर विकास राज्य मंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’ को मिली, वह भड़क गए। मंत्री तुरंत अपने सैकड़ों आक्रोशित समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ देर रात ही कोतवाली पुलिस स्टेशन जा पहुंचे।

उन्होंने पुलिस स्टेशन के भीतर ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। मंत्री राकेश राठौर ने पुलिस पर गंभीर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस थाने में माफियाओं को कुर्सियां दी जाती हैं और उन्हें बादाम खिलाए जाते हैं। इसके विपरीत, अपनी ही सरकार में न्याय की मांग कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं को जमीन पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता है।

उन्होंने अधिकारियों से दोनों कार्यकर्ताओं को तुरंत बिना किसी शर्त के रिहा करने की मांग की। थाने के भीतर मंत्री और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी देर तक हाई-वोल्टेज ड्रामा और लंबी बातचीत का दौर चला। आखिरकार, बढ़ते राजनीतिक दबाव के आगे झुकते हुए पुलिस प्रशासन ने देर रात पिता जितेंद्र मिश्रा और पुत्र शुभम मिश्रा को रिहा कर दिया। दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई के बाद मंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’ खुद उन्हें अपनी निजी कार में बैठाकर उनके घर छोड़ने गए।
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