लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अदालती आदेशों की अनदेखी करना वरिष्ठ नौकरशाहों को भारी पड़ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कर्मचारियों को वेतन और पेंशन लाभ देने के चार साल पुराने आदेश का पालन न करने पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने राज्य सरकार के चार वरिष्ठ प्रमुख सचिवों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय कर दिए हैं।
अदालत की इस बड़ी कार्रवाई के दायरे में अपर मुख्य सचिव (वित्त) दीपक कुमार, प्रमुख सचिव (नमामि गंगे) अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव (सिंचाई) अनिल गर्ग और प्रमुख सचिव (ग्रामीण अभियंत्रण) सौरभ बाबू आए हैं। इसके साथ ही, पीडब्ल्यूडी के अपर मुख्य सचिव अजय चौहान के खिलाफ अगली सुनवाई में आरोप तय किए जाएंगे।
यह मामला सुरेश चंद्र वर्मा और अन्य कर्मचारियों से जुड़ी 37 अवमानना याचिकाओं से संबंधित है। साल 2022 में कोर्ट ने सरकार को कर्मचारियों के वेतन का पुनर्गठन करने, बकाया राशि देने और संशोधित पेंशन का भुगतान करने का आदेश दिया था। आदेश में यह भी स्पष्ट था कि चार महीने में भुगतान न होने पर 7% की दर से ब्याज देना होगा।
राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने इस साल 13 जनवरी को सरकार की याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। इसके बावजूद, मई में महाधिवक्ता द्वारा दिए गए आठ हफ्ते के आश्वासन के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
कोर्ट ने सरकार की और समय मांगने वाली अर्जी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने सभी आरोपित आईएएस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करने और आगामी सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का सख्त निर्देश दिया है।