Homeलखनऊमस्जिदों को सुनियोजित ढंग से ढहाए जाने की घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण

मस्जिदों को सुनियोजित ढंग से ढहाए जाने की घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण

रिपोर्ट : भारत में मस्जिदों को पूर्ण या आंशिक रूप से ढहाए जाने की घटनाएँ कुछ छिटपुट स्थानीय मामलों तक सीमित नहीं लगती हैं। यदि सामूहिक रूप से देखा जाए, तो पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से आई रिपोर्टें एक व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करती हैं। इस पैटर्न में प्रशासनिक कार्रवाइयाँ, कानूनी विवाद, सड़क चौड़ीकरण और विकास परियोजनाएँ, इस्लामोफ़ोबिया, मुस्लिम-विरोधी नफ़रत, विरोध प्रदर्शन और मुस्लिम धार्मिक स्थलों के आसपास सांप्रदायिक तनाव शामिल हैं।

‘इस्लामोफ़ोबिया मॉनिटर’ की एक नई रिपोर्ट, जिसका शीर्षक ‘इंडियाज़ मॉस्क अंडर अटैक’ है, इन घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण करती है और उनके कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक संदर्भों की जाँच करती है। यह रिपोर्ट मस्जिदों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों, मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने वाले अभियानों और मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ बयानबाज़ी के बीच स्पष्ट संबंधों की भी पड़ताल करती है।
सितंबर 2026 की मीडिया रिपोर्टों की समीक्षा के आधार पर, इस्लामोफ़ोबिया मॉनिटर ने ऐसी घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण किया है जिसमें कम से कम सात मस्जिदों को पूरी तरह या आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया। इनमें से पाँच मस्जिदें ऐतिहासिक महत्व की थीं, जिनमें से कुछ एक सदी से भी अधिक पुरानी थीं। संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके लिए कथित अतिक्रमण, सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर निर्माण, आवश्यक परमिट की अनुपस्थिति, सड़क चौड़ीकरण की पहल और विकास परियोजनाओं जैसे कारणों का हवाला दिया। इनमें से कुछ घटनाएँ अदालती कार्यवाहियों के बाद हुईं या उनसे जुड़ी हुई थीं।

सितंबर 2026 में, मस्जिद विध्वंस के सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में सामने आए, जहाँ 2028 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत सड़कों को चौड़ा करने के लिए कई मस्जिदों के हिस्सों को हटा दिया गया। इनमें लगभग 600 साल पुरानी शाही मस्जिद भी शामिल थी। कार्रवाई के दौरान मस्जिद पर एक मीनार गिर गई, जिससे उसके आंतरिक हिस्से को नुकसान पहुँचा। प्रशासन ने इस घटना को एक दुर्घटना बताया, जबकि स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

‘इस्लामोफ़ोबिया मॉनिटर’ की रिपॉर्ट के मुताबिक 11 सितंबर को हुसामी मस्जिद का 8 से 8.5 फीट का हिस्सा हटा दिया गया, जबकि 1 सितंबर को 100 से 150 साल पुरानी मदीना मस्जिद का एक हिस्सा ढहा दिया गया। 600 साल से अधिक पुरानी जमीयतुल कुरैश कस्साबान मस्जिद के खिलाफ भी कार्रवाई की खबरें आईं, हालांकि, विध्वंस के दायरे और कार्रवाई रोकी गई या नहीं, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।

दिल्ली के शालीमार बाग में, दिल्ली नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण का हवाला देते हुए 23 सितंबर की आधी रात को मदीना मस्जिद के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। हरियाणा के फरीदाबाद में, 22 सितंबर को एक निर्माणाधीन मस्जिद को इस आधार पर ढहा दिया गया कि इसका निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के किया जा रहा था।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में, कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित लगभग 150 साल पुरानी एक मस्जिद को अधिकारियों द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध संरचना घोषित किए जाने के बाद 5 सितंबर को ध्वस्त कर दिया गया। मस्जिद प्रबंधन का कहना था कि यह भूमि वक्फ बोर्ड की है और उन्होंने अपने दावे के समर्थन में 1911 के दस्तावेजों का हवाला दिया।इन मस्जिदों से जुड़े मामलों के अलावा, इस्लामोफ़ोबिया मॉनिटर की रिपोर्ट में आठ अन्य ऐसे मामलों का भी दस्तावेज़ीकरण किया गया है जहाँ मस्जिदों को नोटिस या जुर्माना मिला, निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए गए, भूमि रिकॉर्ड की जाँच का सामना करना पड़ा, या संभावित विध्वंस का खतरा मंडरा रहा था।

‘इस्लामोफ़ोबिया मॉनिटर’ की इस रिपोर्ट को देश के भीतर और बाहर के अनेक मीडिया मीडिया संस्थानों ने जगह दी है। इसके विपरीत सरकार इस तरह के आरोपों को शुरू से ख़ारिज करती रही है।

RELATED ARTICLES

Most Popular