लखनऊ: लखनऊ और आस पास के ज़िलों में मानसूनी बारिश थमने के बाद डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। प्रदेश की राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में ठंड लगकर तेज बुखार आने और प्लेटलेट्स गिरने की शिकायतों के साथ पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में अचानक बड़ा उछाल आया है। शुरुआती जांच में इन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो रही है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अगले 15 दिनों को बेहद संवेदनशील घोषित किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ के चार सबसे बड़े अस्पतालों में इस समय डेंगू के 34 संक्रमित मरीज उपचाराधीन हैं, जिन्हें वार्डों में भर्ती कर विशेष निगरानी में रखा जा रहा है। अस्पतालों के अनुसार मरीजों का विवरण इस प्रकार है:
• केजीएमयू (KGMU): 14 मरीज
• लोहिया संस्थान: 10 मरीज
• बलरामपुर अस्पताल: 06 मरीज
• सिविल अस्पताल: 04 मरीज
जलभराव और बढ़ता जलस्तर बनी मुख्य वजह
हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे तटीय और निचले इलाकों की कई कॉलोनियों में गंभीर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जमा पानी और हवा में अत्यधिक नमी के कारण एडीज (मच्छर) तेजी से पनप रहे हैं। डॉक्टरों का अनुमान है कि यदि जलभराव और मच्छरों के पनपने पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो अगले दो हफ्तों में मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. एन.बी. सिंह ने बताया कि विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। जिन इलाकों से डेंगू के सक्रिय मामले सामने आए हैं, वहां विशेष टीमों को तैनात कर एंटी-लावा दवाओं और फॉगिंग का सघन छिड़काव कराया जा रहा है ताकि मच्छरों के चक्र को तोड़ा जा सके।
डॉक्टरों की सलाह: बचाव ही एकमात्र उपाय
चिकित्सकों के अनुसार, डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर अमूमन साफ पानी में पनपता है और दिन के समय काटता है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से निम्नलिखित सावधानियां बरतने की अपील की है:
• घर के भीतर, छत, कूलर, गमलों, टायरों और खाली बर्तनों में पानी बिल्कुल जमा न होने दें।
• कूलर का पानी सप्ताह में कम से कम दो बार अनिवार्य रूप से बदलें।
• सोते समय मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंट का उपयोग करें।
• बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाकर ही स्कूल या बाहर भेजें।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, सिर और आंखों के पीछे तेज दर्द, मांसपेशियों-जोड़ों में जकड़न, जी मिचलाना, उल्टी आना या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य वायरल न समझें। मसूड़ों या नाक से खून आने अथवा सांस लेने में तकलीफ होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में खुद से कोई दवा न लें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या योग्य डॉक्टर से संपर्क कर जांच कराएं।