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पुस्तक समीक्षा : भारत में मॉब लिंचिंग: एक रिकॉर्ड

पुस्तक समीक्षा: भारत में मॉब लिंचिंग: एक रिकॉर्ड – 2014-2024 (अंग्रेजी)
संपादक: डॉ. ज़फरुल-इस्लाम खान
पृष्ठ संख्या: 744
प्रकाशक : फरोस मीडिया, नई दिल्ली
प्रकाशन वर्ष: 2026
मूल्य : 300 रु

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. ज़फरुल-इस्लाम खान द्वारा संकलित और संपादित पुस्तक “भारत में मॉब लिंचिंग: एक रिकॉर्ड – 2014-2024” समकालीन भारत के सामाजिक और कानूनी परिदृश्य का एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण दस्तावेजीकरण है। 744 पृष्ठों की यह विस्तृत कृति मई 2014 से मई 2024 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में हुई भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) की घटनाओं का एक गहरा और तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

यह पुस्तक ऐसे समय में एक आवश्यक अकादमिक और पत्रकारिता हस्तक्षेप के रूप में सामने आती है, जब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) जैसे आधिकारिक संस्थान मॉब लिंचिंग को एक अलग श्रेणी के तहत दर्ज नहीं करते हैं। डेटा के इस अभाव को दूर करने के लिए संपादक ने समाचार पत्रों की रिपोर्टों, जमीनी केस स्टडीज और विजुअल साक्ष्यों का सहारा लिया है।

पुस्तक कुल 1,743 घटनाओं को दर्ज करती है, जो यह दर्शाती हैं कि भीड़ द्वारा कानून को हाथ में लेने की प्रवृत्ति समाज में कितनी गहराई से जड़ें जमा चुकी है।समीक्षात्मक दृष्टि से देखा जाए, तो यह पुस्तक लिंचिंग के पीछे के विविध कारणों का एक व्यापक वर्गीकरण करती है। यह केवल धार्मिक या गोवंश से जुड़े संदेह, जिसके क्रमशः 89 और 53 मामले दर्ज हैं, तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोड रेज, मामूली विवादों (571 मामले) और बच्चा चोरी की अफवाहों से उपजी हिंसा को भी उजागर करती है।

पुस्तक प्रभावी ढंग से यह रेखांकित करती है कि कैसे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली अफवाहें पल भर में किसी आम नागरिक को हिंसक भीड़ के निशाने पर ला देती हैं। पुस्तक में दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुई लक्षित हिंसा का विशेष रूप से विश्लेषण किया गया है, जो सामाजिक असमानता को दर्शाता है।

यह पुस्तक केवल अपराधों की एक सूची नहीं है, बल्कि यह हमारी सामूहिक चेतना, पुलिस प्रशासन और न्याय व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर दस्तावेज है। यह शोधकर्ताओं, समाजशास्त्रियों और कानूनविदों के लिए एक अत्यंत मूल्यवान संदर्भ ग्रंथ है, जो भारत में कानून के शासन और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक कड़ा संदेश देती है।

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