ऑनलाइन खेले जाने वाले गेम के प्रति बच्चों में पागलपन की हद तक जुनून देखा गया है। इसका उनके मन मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जो कि चिंता का विषय है। ऑनलाइन गेम कंनियां बच्चों और युवा वर्ग में पैदा जुनून का फायदा उठा कर उनसे पैसा उगाहने लगी हैं। कई गेम तो जुए की तरह हो गये हैं, जिसके जरिये पैसा लगाने वालों में जीत-हार का फैसला भी होता है। ऐसे ही एक गेम के चक्कर में पिछले दिनों एक बच्चे की जान चली गयी। गेम के कारण पहले भी खुदकुशी करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले दिनों फ्री फायर गेम में पैसा गंवाने के बाद तनाव के कारण एक तेरह साल के बच्चे ने खुदकुशी कर ली।
मध्यप्रदेश के छतरपुर में 13 साल का बच्चा ऑनलाइन गेम में 40000 रुपए हार गया। इस हार की कुंठा, पछतावा और तनाव के कारण उसने फांसी लगाकर जान दे दी। मरने से पहले उसने सुसाइड नोट में लिखा कि मम्मी और पापा मुझे माफ़ करना। मैं बहुत ज्यादा पैसे गेम में हार गया, जिससे में डिप्रैशन में हूं इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं। परिजनों ने बच्चे को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल दिया दे रखा था।
कोरोना के कारण स्कूल बन्द होने के बाद जब से ऑनलाइन क्लास शुरू हुए हैं मोबाइल बच्चों के हाथ तक पहुंच गये। अब इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। पिछले एक साल में बच्चे पढ़ाई से ज़्यादा ज़्यादा गेम खेलने लगे हैं। इसके अलावा वे इंटरनेट के माध्यम से परोसी जा रही दूसरी खराबियों की चपेट में भी तेजी से आ रहे है। अपने दैनिक जीवन में व्यस्तता के कारण परिजनों द्वारा उनकी मोबाइल से संबंधित गतिविधियों पर निगाह रख पाना संभव नहीं हो पा रहा।
इंटरनेट के माध्यम से गेम, जुआ और अश्लीलता परोसने वाली साइटों को इसका पूरा फायदा मिल रहा है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑनलाइन तथा डिजिटल गेम्स के बच्चों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव के बारे में चिंता जताते हुए कहा था कि ज़्यादातर गेम बच्चों में मेंटल स्ट्रेस पैदा कर रहे हैं। कहना गलत न होगा कि ऑनलाइन गेम न सिर्फ बच्चों में तनाव पैदा कर रहे है, बल्कि उनके व्यवहार को हिंसक भी बना रहे हैं। इस तरह की कई खबरें सामने आयी हैं जब मोबाइल गेम खेलने से रोकने या बच्चों के हाथ से मोबाइल ले लेने पर उन्होंने हिंसक प्रतिक्रिया दी है। जान से माने की धमकी देना, खुदकुशी की धमकी देना या घर से भाग जाने की घटनाएं सामने आयी हैं।
इस बारे में मनोचिकित्सकों का कहना है कि मोबाइल बच्चों में लत बनती जा रही है। वे जो कुछ उसमें देखते या खेलते हैं, उसका अक्स उनके स्वाभाव में आ रहा है। वे उसी तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जो बच्चे मोबाइल पर गेम ज्यादा खेल रहे हैं वे गेम एडिक्शन के शिकार हो रहे हैं। एक मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिवेदी का कहना है कि ऑनलाइन गेम्स की लत के शिकार बच्चों के व्यवहार में अक्रामकता के साथ अवसाद, एडीएचडी और एंग्जायटी की प्रवृत्ति देखी गयी है। कोरोनाकाल में बच्चों के घर में कैद होने के चलते मोबाइल पर उनकी निर्भरता बढ़ी है, इसलिए वर्तमान में बच्चों की बड़ी संख्या गेम एडिक्शन की शिकार है।
गेम कंपनियों किस तरह से बच्चों के जीवन के साथ गेम खेल रही हैं, इसको सरकार और परिजनों को समझने की ज़रूरत है। पहले कंपनियां गेम फ्री में डाउनलोड करेके खेलने की सुविधा देती थी । जब उनकी मार्केट बन गयी तो अब वे गेम का कुछ भाग फ्री देती है। उससे आगे के वर्जन के लिए प्लेयरों से पैसे की मांग की जाती है। इसके अलावा उसमें कैरेक्टर की क्षमता और उसके हथियारो की मारक क्षमता के अनुसार पैसे वसूले जाते हैं। गेम में दीवाना हो चुके बच्चे चोरी छिपे अपने मां-बाप के डेंविट कार्ड का इस्तेमाल करके उनको खरीदते हैं। बहुत से केस में मां-बाप को बच्चों की इस चोरी का पता ही नहीं चल पाता या बाद में पता चलता है।
जैसे-जैसे बच्चे गेम में अगले लेवल पर जाते हैं, उनको गेम जीतने के लिए ज़्यादा पैसों की ज़्रूरत होती है। पबजी गेम के प्रति बच्चों की दीवानगी से कौन भला परिचित नहीं। मीडिया में आयी ख़बरों के मुताबिक पबजी के कारण कई बच्चों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। परिजनों के रोक टोक लगाने के कारण कई बच्चों ने खुदकुशी कर ली। चीन से संबंध बिगड़ने के बाद भारत सरकार ने पबजी पर रोक लगा दी। इससे पहले ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल काफी चर्चा में रहा। इस रहस्यमयी गेम में बच्चों को अजीबोगरीब टास्क दिये जाते थे, जिसकी वजह से बाद में बच्चे खुदकुशी कर लेते थे। काफी हंगामा मचने के बाद इस गेम पर पाबंदी लगायी गयी। मध्य प्रदेश की घटना के बाद राज्य सरकार ने सराहनीय कदम उठाते हुए फ्री फायर गेम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और उसको प्रतिबंधित करने की बात कही है।
बहुत शातिराना तरीके से बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत लगयी गयी। कुछ विशेषज्ञों की राय है कि अब अनेक गेमिंग कंपनियां अब ऑनलाइन जुआ भी करा रही हैं। बहुत संभव है कि जो बच्चे ऑनलाइन गेम खेल रहे हैं वे भी धीरे-धीरे जुआ की ओर जा सकते हैं। पिछले दिनों भास्कर के इंदौर संस्करण में एक विज्ञापन छपा, जिसका शीर्षक था ’स्पिनर घुमाओ ओर विनर बनो’ कल तक जो जुआ चोरी छिपे खेला जा रहा था अब खुलेआम खेला जा रहा है। इसके अलावा विज्ञपन दे कर लोगों को खेलने का लालच भी दिया जा रहा।
वर्तमान में ऑनलाइन गेम खेलने का ज़्यादातर शौक बच्चों ओर युवाओं में है। इनमें अपना भला या बुरा समझने की क्षमता से कहीं ज़्यादा जज्बात में फैसला करने की आदत होती है। भारत में करीब 530 करोड़ स्मार्टफोन यूजर हैं। जियो के आने के बाद अधिकतर स्मार्टफोन इंटरनेट से जुडे़ हुए हैं। कईयों को लगता है कि वे गेम खेलकर बहुत सारा पैसा आसानी से कमा सकते हैं। इसी कोशिश में वे अपना या परिजनों का पैसा गंवा बैठते हैं।